DELED SBA Solution File – Organisation of social festivals in the schools

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511.3.3 Organisation of social festivals in the schools

Contribution to School programmes

सामाजिक / राष्ट्रीय त्योहारों का आयोजन

(i) त्यौहारों के आयोजन के लिए प्रारंभिक गतिविधियों का विवरण:

प्रत्येक विद्यालयों में राष्ट्रिय एवं सामाजिक पर्वो का आयोजन होता रहता है. पर्व के आने से पहले ही इसकी तैयारियां होने लगती है. जिससे पर्व के दिन सभी गतिविधियां सुचारु रूप से सम्बंधित की जा सके. किसी भी पर्व के आयोजन की प्रारभिक गतिविधियां सबसे  महत्वपूर्ण है. सबसे पहले तो सभी अध्यापक साथ मिलकर किस पर्व का कैसे आयोजन  करना है इसकी चर्चा होती है. पर्व के लिए क्या क्या करना है ? कौन के कार्यक्रम का आयोजन करना है ? ये सभी तय  किया जाता है. सभी अध्यापको के बिच आयोजन के कार्यभार का विभाजन किया जाता है.

 

अध्यापक अपने कार्यभार के आधार से छात्रों के साथ मिलकर पर्व – त्यौहार के पूर्व की गतिविधियां का आयोजन करने लगते है. इसमें विद्यालय की स्वच्छता – सुशोभन, नाट्य रूपांतर, अभिनय , गीत, स्वागत , वक्तव्य,  रंगमंच इन सभी की  तैयारी की जाती है.CopyRight : www.HindiHelpguru.com

(ii) त्यौहारों के आयोजन के उद्देश्य:

  • कार्यक्रम – त्योहारों की गतिविधि में भाग लेने से छात्रों में सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रति रूचि जाग्रत होती है.
  • छात्रों मे अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का निर्माण होता है.
  • अपने सामाजिक और सांस्कृतिक बातों से छात्र अवगत होते है.
  • छात्रों को अपनी कला को सामने लेन का मौक़ा मिलता है.
  • छात्र की व्यक्तिगत और सामूहिक प्रतिभा को निखारा जा सकता है.
  • राट्रीय पर्वो के द्वारा राष्ट्र के प्रति सन्मान और देशभक्ति की भावना उत्पन्न होती है.
  • पर्वो में प्रतिभाग करने के छात्रों के समूह भावना और कर्तव्य भावना का निर्माण होता है.
  • छात्रों में समरसता का भाव उत्पन्न होता है.
  • किसी भी पर्व – त्यौहार के बारे में सविशेष ज्ञान प्राप्त होता है.
  • ऐसे पर्वो से पाठ्यक्रम आधारित गतिविधियां के अध्ययन कार्य में भी सहायता मिलती है.

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(iii) त्योहारों के आयोजन के लिए किए गए कदम:

  • सबसे पहले कौन से पर्व का विद्यालय में कब आयोजन करना है इसकी चर्चा की गयी.
  • सभी छात्र और अध्यापक को अपनी भूमिका और कार्यभार दिया गया.
  • सभी ने अपनी तैयारियां शुरू की और एक दूसरे को मदद भी की.
  • एक सूचि तैयार की इसमें क्या क्या कार्यक्रम करना है ये सुनिश्चित किया गया.
  • पर्व – त्यौहार के आयोजन के लिए जरुरी चीजों को इकट्ठा किया गया.
  • पर्व – त्यौहार में हिस्सा लेने के लिए अभिभावक और अन्य लोगो को आमत्रण पत्र भेजा गया.
  • सभी छात्रों ने अपने कार्यो के लिए तैयारियां शुरू कर दी.
  • तैयारी के अंतिम चरण में सभी छात्र और अध्यापक के साथ कार्यक्रम का रिहर्सल किया गया.
  • आयोजन में जो जो गलतियां नजर आयी इसे सुधारने का अवसर – सूचन दिया गया.

(iv) स्कूल में त्योहार आयोजित करने की प्रक्रिया:

जिस दिन विद्यालय में त्यौहार का आयोजन किया गे था उस दिन सभी अध्यापक पूर्व समय उपस्थित हुए. सभी छात्र भी समय पूर्व अपने अपने ककार्यो में लगा गए. कार्यक्रम के लिए रंगमंच का निर्माण किया गया. आमंत्रित श्रोता और अभिभावक के लिए बैठक व्यवस्था सुनिश्चित की गयी. बैठने के लिए कुर्शी की व्यवस्था की गयी. जिस छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था वो सभी सज सज्जा में लग गए. पर्व के आयोजन में आये अतिथि , छात्र , स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य, अभिभावक सभी का प्रधानाचार्य के द्वारा स्वागत किया गया. सरस्वती वन्दना – प्रार्थना से कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. दिप प्रज्जवलित किया गया. स्कूल के एक छात्र  ने इस पर्व – त्यौहार के बारे में अपने विचार सभी के सामने प्रकट किये. सांस्कृतिक कार्यक्रम को प्रसारित किया गया. नाट्य प्रस्तुति हुयी, प्रश्न चर्चा का आयोजन किया गया. गीत के साथ छत्राओं ने अपने विचार सबके सामने प्रस्तुत किये. मुख्य अतिथि के द्वारा सभी को सम्बोधित किया गया. विद्यालय के प्रमुख अतिथि द्वारा छत्रो की प्रशंसा की गयी और बधाई दी.सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेनेवाले  सभी छात्रों को पुस्तक का सरपाव दिया गया.CopyRight : www.HindiHelpguru.com

(v) त्यौहारों के आयोजन के लिए समस्याएं सामने आईं:

  • १,२, ३ की कक्षा के बच्चो ने अनुशासन का पालन नहीं किया और बिच बिच में खड़े हो जाया करते थे.
  • कई अभिभावक समय के पूर्व नहीं आ पाए और सभी कार्यक्रम नहीं देख पाए.
  • कुछ छात्र को कार्यक्रम में हिस्सा लेना था फिर भी अनुपस्थित रहे.
  • कार्यक्रम के बिच में कुछ समय के लिए बिजली की समस्या ने परेशान किया.

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(vi) समस्या से संबंधित संकल्प पर विचार किया गया:

त्यौहार – पर्व के आयोजन में आयी समस्याएं जब फिर से कार्यक्रम आयोजित किया जाये तब इसका सामना ना करना पड़े इसलिए समस्या के समाधान की कल्पना की गयी.

  • छोटी कक्षा के बच्चो को किसी भी कार्यक्रम में अनुशासन का पालन कैसे करना है ये समझाया जाये.
  • सभी अभिभावक और अतिथि पूर्व समय आ जाये इसलिए जब इसे सूचित किया जाये तब साथ में समय सारणी भी दी जाये.
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेनेवाले सभी छात्रों को पहले से पूछ लिया जाए की कोई अनुपस्थित रहनेवाला है या नहीं.
  • बिजली की कटौती के लिए वैकल्पिक आयोजन किया जाए. CopyRight : www.HindiHelpguru.com

(vii) स्कूल के वातावरण पर त्योहारों का प्रभाव:

  1. छात्रों में समानता और सहभागिता का भाव उत्पन्न होता है.
  2. छात्र को अध्ययन के अलावा अन्य गतिविधियां में हिस्सा लेने में आनंद आया.
  3. कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे सभी छात्रों को अपनी कला का प्रदर्शन करनेका मौक़ा मिला.
  4. अपनी संस्कृति और सामाजिकता के प्रति बच्चो में कर्त्तव्य भावना का विकास हुआ.
  5. छात्रों को समूह में साथ मिलकर काम करने का भाव उत्पन्न हुआ.
  6. कार्यक्रम का अध्ययन के साथ अनुबंध होने के कारण छात्रों ने कुछ नए ज्ञान का अर्जन किया.
  7. कला , साहित्य और सांस्कृतिक शिक्षा का अभिगम भी साकार हुआ.
  8. अभिभावकों की विद्यालय की गतिविधियां प्रति विशवास महसूस हुआ.

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